रिपोर्ट-उमेश श्रीवास्तव :एक तरफ जहाँ केंद्र व राज्य सरकार मत्स्य पालन व किसानों को बढ़ावा देने में लगी हुई है। वही दूसरी तरफ कुछ दबंग फैक्टरी संचालक खतरनाक कैमिकल का इस्तेमाल कर रहे है। फिर उसी कैमिकल को गंगा जी विलीन कर रहे है।

ताज़ा मामला वाराणसी का है जहाँ फैक्टरी संचालक जलीय जीवो के लिए खतरा बना हुआ है जिसकी शिकायत पंकज त्रिवेदी गंगा समिति के सदस्य ने की है।

उन्होंने बताया कि गौतम उद्योग एलम (फिटकिरी) का उत्पादन करता है जिसके लिये एक खास प्रकार का रासायनिक पदार्थ जिसमे सल्फ्यूरिक एसिड की मात्रा 70 से 75% तक होनी चाहिये जो कि वह अपना उत्पादन तो कर रहा है।

लेकिन उसकी आड़ में पैसे लेकर कीटनाशक उत्पादन करने वाले उद्योगों से उनका वेस्ट भी अपने यहाँ खाली करवा रहा है। जिसमे की सल्फ्यूरिक एसिड की मात्रा मात्र 20से 30% ही है बाकी खतरनाक घातक पदार्थ हैं जो उसके किसी काम के नही हैं।

कीटनाशक उद्योग वाले अपना खर्च बचाने के लिये इस तरह के उद्योगों को अपना वेस्ट दे देती हैं जिसको ट्रीटमेंट प्लांट से ही शुद्ध करके ही नाले या नहर में छोड़ा जाना चाहिये ऐसे प्लांट मुजफ्फरनगर या नेपाल बॉर्डर पर ही है।

गौतम उद्योग के पास ऐसा कोई ट्रीटमेंट प्लांट नहीं है अतः उस वेस्ट को लेने का अधिकृत भी नही है। लेकिन एलम बनाने की आड़ में पैसे लेकर अपने यहाँ गाड़ी खाली करवाकर बिना ट्रीटमेंट के नाले द्वारा छोड़ा जा रहा है।जो नाला आगे जाकर गंगा नदी में मिलता है कुछ माह पूर्व सीतापुर में एक प्लांट वाला ये वेस्ट ले रहा था जहाँ और बिना शुद्धिकरण के नहर में छोड़ रहा था जिससे जहरीली गैस से 8 किसानों की मृत्यु हो गई थी । पर्यावरण व प्रदूषण की दृष्टि से बेहद खतरनाक है ।



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